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ट्रंप के “Zero Tarifk – India-US

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वाशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हाल ही में हुई भारत-अमेरिका ट्रेड डील (व्यापार समझौता) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत चर्चा पैदा कर दी है। ट्रंप ने एक “Historic Trade Deal” यानी ऐतिहासिक व्यापार समझौते होने का दावा किया है और कहा था कि भारत अमेरिका से आयातित सामानों पर लगा टैरिफ (कर) लगभग “शून्य (Zero)” तक कर देगा। लेकिन इसके बाद व्हाइट हाउस (White House) ने इसके बारे में एक भारत और अमेरिका का व्यापार दिल्ली के लिए जारी कर दिया गया है महत्पूर्ण बातें सामने आए हैं दिल्ली के संयुक्त बयान क्टशीट जारी कर स्पष्टता दी है, जिसमें कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं कि क्या वास्तव में ऐसा डील है और दावों का असली सच क्या है।
सबसे पहले, यह समझना जरूरी है कि यह समझौता कानूनी समझौता नहीं, बल्कि एक ज्वाइंट स्टेटमेंट (संयुक्त बयान) के रूप में जारी हुआ है, जिसमें दोनों देशों ने व्यापार और टैरिफ से जुड़ी दिशा तय करने पर सहमति जताई है।
ट्रंप के “Zero Tariff” दावे का असली मतलब
ट्रंप ने कहा था कि भारत अमेरिका के उत्पादों पर लगाए सभी टैरिफ को “शून्य” तक कर देगा और बदले में अमेरिका भी भारतीय वस्तुओं पर शुल्क हटाएगा। हालांकि व्हाइट हाउस फैक्टशीट से स्पष्ट हुआ कि यह दावा पूरी तरह सच नहीं है और “शून्य टैरिफ” लागू होने के लिए कई शर्तें और श्रेणियाँ हैं। This is being done after bringing traffic from zero


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असल में, डील का ढांचा कुछ इस प्रकार है:
अमेरिका ने भारत पर लगाए कुछ अतिरिक्त टैरिफ हटाए हैं, जैसे रूसी तेल पर लगाया गया 25% अतिरिक्त शुल्क हटाना।
अमेरिका ने भारत के लिए पारस्परिक टैरिफ (Reciprocal Tariff) को 25% से घटाकर लगभग 18% कर दिया है।
वहीं, भारत ने अमेरिका से आयात होने वाले कई औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाने या हटाने की प्रतिबद्धता जताई है, जैसे वाइन, स्पिरिट, सूखे मेवे, फल-सब्ज़ियाँ इत्यादि। इन सब्जियों में खरीदारी करने में काफी अच्छा प्रभाव पड़ने की संभावना है The White House

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इसका मतलब यह है कि “पूरे व्यापर पर शून्य टैरिफ” नहीं हुआ, बल्कि कुछ श्रेणियों पर छूट और कटौती के लिए सहमति बनी है। शून्य टैरिफ केवल कुछ उत्पादों पर ही संभव है — और उसकी सूची अभी तैयार होने वाली है।
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इस डील के प्रमुख बिंदु
व्हाइट हाउस फैक्टशीट में यह भी कहा गया कि:
भारत ने डिज़िटल टैक्स हटाने और डिजिटल व्यापार के लिए नियमों पर चर्चा करने की इच्छा जताई है।
दोनों देश 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी उत्पादों की खरीद की प्रतिबद्धता जताएँगे — जिसमें ऊर्जा, कृषि और प्रौद्योगिकी शामिल हैं।
गैर-टैरिफ बाधाओं (जैसे क्वोटा, तकनीकी नियम आदि) को कम करने के लिए बातचीत जारी रहेगी। ट्रैफिक में लगभाग 500 अरब डॉलर अमेरिकी उत्पदाकों की खरीद बंद बताया जा सकता है
क्या वाकई “शून्य टैरिफ” हुआ?
सच्चाई यह है कि डोनाल्ड ट्रंप ने जो “Zero Tariff” दावा किया, वह वर्तमान तथ्य के अनुरूप नहीं है। असल में, डील में कुछ श्रेणीगत छूट शामिल हैं, लेकिन संपूर्ण व्यापार को शून्य टैरिफ पर लाने की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
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ऐसे कुछ विश्लेषणों के मुताबिक (जैसा कि व्यापार समाचार साइटों ने बताया है), कुछ उत्पादों पर टैरिफ को 50% से 0% या 18% तक घटाया जाना शामिल है, लेकिन यह सभी चीज़ों पर लागू नहीं है। उदाहरण के लिए भारत से $30 बिलियन के निर्यात पर शुल्क को 18% और $10 बिलियन के निर्यात पर 0% करने पर चर्चा हो रही है, लेकिन यह भी पूरे विवरण का हिस्सा है और इसे लागू करने की समय सीमा और शर्तें हैं। भारत में 30 बिलियन डॉलर के खिलाफ चर्चा हो रही है
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भारत-अमेरिका डील पर भारत की स्थिति
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह संवेदनशील कृषि और घरेलू उत्पादों पर टैरिफ हटाने में सावधान रहेगी और राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखेगी। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, भारत ऐसे क्षेत्रों में तुरंत शून्य टैरिफ देने से पहले अपने घरेलू उद्योगों की रक्षा करना चाहता है। घरेलु उत्पादन को हटाने में सावधान रहेगी
व्यापार विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता दोनों देशों के लिए लाभ और चुनौतियाँ लेकर आता है:
भारत के निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में कुछ उत्पादों पर प्रतिस्पर्धात्मक फायदा मिल सकता है।
अमेरिका के निर्यातकों को भारतीय कृषि, ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्रों में विस्तार के मौके मिलेंगे।
हालांकि, भारत यह सुनिश्चित करेगा कि संवेदनशील क्षेत्रों पर घरेलू सुरक्षा बरकरार रहे। तकनिकों में विस्तार के मौका मिलेगा

conclusions

ट्रंप का “Zero Tariff” का दावा एक मार्केटिंग और रणनीतिक बयान की तरह है, जबकि व्हाइट हाउस फैक्टशीट और डील की असली रूपरेखा में यह स्पष्ट नहीं है कि पूरे व्यापार पर शून्य टैरिफ लागू होगा। डील का उद्देश्य है पारस्परिक टैरिफ को कम करना, व्यापार बाधाओं को कम करना और दोनों देशों के व्यापार संतुलन को बेहतर बनाना, न कि मात्र “शून्य शुल्क” देना।

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